नई दिल्ली : केंद्र सरकार अलग-अलग पार्टी के संसदों से संपर्क और संवाद के लिए संसदीय मैत्री ग्रुप बनाने पर विचार कर रही है। पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दुनियाभर में भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों की सफलता के बाद संसदीय मैत्री समूह बनाने के बारे में सोच विचार किया जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने इसकी जानकारी दी।मुंबई में प्राक्कलन समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि कई देशों में ऐसे संसदीय समूह होते हैं और वे हमें भी ऐसे ग्रुप बनाने के लिए कह रहे हैं। अब हम इस पर काम कर रहे हैं। संसदीय मैत्री ग्रुप को लेकर आने वाले संसद सत्र में सभी दलों के साथ चर्चा की जाएगी।
संसदीय मैत्री ग्रुप संसदीय कूटनीति को मजबूत करने से लेकर कई मुद्दों पर बेहतर सहयोग के लिए काम करते हैं।अलग-अलग पार्टी के सदस्य वाले इन मैत्री समूहों का विचार उन प्रतिनिधिमंडलों की यात्राओं के दौरान भी सामने आया, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दुनियाभर के अलग-अलग देशों में गए थे।ओम बिड़ला ने भारतीय संसद की प्राक्कलन समिति की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि देशभर की प्राक्कलन समितियों के प्रयासों से सरकारी धन के अनावश्यक खर्च को रोका गया है। अब हमारी कोशिश है कि प्राक्कलन समितियों के सभी सदस्य टेक्नोलॉजी जैसे एआई, डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करें ताकि समीक्षा और अच्छी हो सके।
टेक्नोलॉजी पारदर्शिता और जवाबदेही लाती है। इसके लिए हम सदस्यों को ट्रेनिंग भी देंगे। 23 साल बाद हो रहे इस सम्मेलन में संसद और राज्यों संघ राज्य क्षेत्रों के विधानमंडलों की प्राक्कलन समितियों के सभापति और सदस्य शामिल हुए। बिरला ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों की प्राक्कलन समितियों की 90-95 फीसदी तक सिफारिशों को सरकार ने लागू किया है। कुछ राज्यों में यह 60 फीसदी से कम है, हिमाचल प्रदेश में यह 15 फीसदी ही है। बिड़ला ने सभी समितियों को एक-दूसरे से अपने अनुभव साझा करने का सुझाव दिया ताकि आंकड़ा हर राज्य में बढ़ सके।

