नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को और भी ताकतवर बनाने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जरूरी चीजों को खरीदने की मंजूरी दी है। इससे सेना की तैयारी और मजबूत होगी। सेना अब ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसे हथियार खरीदेगी। ये फैसले इसलिए लिए गए हैं ताकि सेना हर तरह की चुनौती का सामना करने को तैयार रहे।सेना को आतंकवाद से लड़ने और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ये हथियार बहुत जरूरी हैं। मंत्रालय ने सेना को अधिकार दिया है कि वो खुद ही आधुनिक हथियार चुनकर खरीदे। साथ ही सेना गोला-बारूद और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार भी खरीदेगी। सेना ने कुछ कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इससे आतंकवाद से निपटने में मदद मिलेगी। आने वाले हफ्तों में और भी कई समझौते होंगे। सेना चाहती है कि उसे जल्द से जल्द आधुनिक हथियार मिल जाएं।
सेना ने नागस्त्र 1आर एडवांस्ड लोइटरिंग सिस्टम खरीदने का फैसला किया है। यह सिस्टम घुसपैठियों को मार गिराने और एलओसी पर दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम है। सेना ने सोलर इंडस्ट्रीज को 158 करोड़ रुपए का ऑर्डर दिया है। इसके तहत 450 नागस्त्र 1आर खरीदे जाएंगे। ये हथियार पहले से ही सेना इस्तेमाल कर रही है। अब जो नया ऑर्डर दिया गया है, उसे 12 महीने में पूरा करना होगा। सेना ने हाइब्रिड मिनी यूएवी भी खरीदे हैं। ये खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और दुश्मनों पर नजर रखने में बहुत उपयोगी हैं। यह एक फिक्स्ड-विंग वीटीओएल प्लेटफॉर्म है। इसका मतलब यह सीधे ऊपर की ओर उड़ सकता है और उतर सकता है। सेना ने इसे चुनने से पहले बहुत बारीकी से इसकी जांच की थी। दो बड़ी तकनीकी कमेटियों ने इसके हर हिस्से की जांच की। यह देखा गया कि इसके अंदर कोई भी चीज चीन में बनी हुई तो नहीं है।
सेना लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार, जैमर और एयर डिफेंस सिस्टम पर ध्यान दे रही है। वह आतंकवाद के खिलाफ न्यू नॉर्मल तरीके से लड़ने के लिए स्वदेशी समाधानों पर भी जोर दे रही है। सेना ने हजारों करोड़ रुपए के हथियार खरीदने की योजना बनाई है। इसमें से ज्यादातर पैसा प्राइवेट कंपनियों को मिलेगा। आने वाले दिनों में 44,000 करोड़ के हथियार खरीदे जा सकते हैं। इसमें लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई के लिए गोला-बारूद भी शामिल है। सेना लॉन्ग रेंज वेक्टर्स पर खास ध्यान दे रही है। ये ऐसे हथियार हैं जो दूर से ही दुश्मन के इलाके में अंदर तक मार कर सकते हैं। सेना अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और भी मजबूत करना चाहती है। सेना एक ऐसा नेटवर्क बनाना चाहती है जो दुश्मनों के हमलों को नाकाम कर सके। सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

