पटना। एक ओर जहाँ बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं तो दूसरी और आम जनता बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त है। क्योंकि गंगा, कोसी, बागमती समेत 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे पटना, वैशाली, मुंगेर, बेगूसराय, बक्सर, भागलपुर और खगड़िया में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में घुस गया है। अब तक 11 लोगों की मौत होने की खबर है जबकि 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से कई जिलों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। चारों ओर फैले पानी के बीच ग्रामीण त्राहिमाम कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन राहत कार्य में जुटा है, लेकिन बड़ी आबादी अब भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है।
उधर गंगा नदी पटना में दीघा घाट पर 51.62 मीटर (117 सेमी ऊपर) और गांधी घाट पर 50.20 मीटर (160 सेमी ऊपर) खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बक्सर में स्टेट हाइवे पर पानी बह रहा है और भागलपुर में कटाव के कारण कई घर नदी में समा गए हैं। कोसी में बराह से 94,775 क्यूसेक और बीरपुर से 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे सुपौल और अररिया में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। साथ ही कोसी बैराज से लगातार हो रहे जल प्रवाह और डिस्चार्ज के कारण मधेपुरा जिले के आलमनगर और चौसा प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का कहर तेज हो गया है। कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दर्जनों गांव प्रभावित हो चुके हैं।
बाढ़ के पानी ने अब ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ घरों और स्कूलों में भी दस्तक दे दी है। उधर बेगूसराय, वैशाली, मुंगेर, खगड़िया और भागलपुर में बाढ़ ने 10 लाख लोगों को प्रभावित किया है, जिसमें 4 मौतें भागलपुर, 6 बेगूसराय और 1 वैशाली में हुई हैं। आपदा प्रबंधन विभाग और एनडीआरएफ की 14 टीमें दरभंगा, सुपौल, मोतिहारी और नालंदा में तैनात हैं। पटना में 35 नावें राहत कार्यों के लिए सक्रिय हैं और जिला नियंत्रण कक्ष (0612-2210118) आपात स्थिति के लिए उपलब्ध है। भागलपुर और बेगूसराय में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और चिकित्सा शिविर शुरू किए गए हैं। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

