Sunday, May 3, 2026
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STF ने सख्त कदम उठाते हुए सबसे खराब लिंगानुपात वाले 5 जिलों के सीएमओ की पीएनडीटी शक्तियां ली जाएंगी वापस

 चंडीगढ़ – हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देश पर हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार के लिए राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक बैठक आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने तथा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के प्रयासों को तेज करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में कहा गया कि सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्साह जनक परिणाम सामने आए हैं। इस वर्ष 1 जनवरी से 28 जुलाई तक राज्य का लिंगानुपात सुधरकर 905 हो गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 899 था।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अवैध गर्भपात के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें दोषी पाए गए डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करना और ऐसे सभी केंद्रों/क्लिनिकों को सील करना शामिल है, जो इस तरह के कदाचार में शामिल पाए जाते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे अस्पतालों और केन्द्रों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध करने से हटा दिया जाए तथा ऐसे केन्द्रों को दी जाने वाली अन्य सरकारी सुविधाएं भी बंद कर दी जाएं। डायलेशन और क्यूरेटेज (डी एंड सी) प्रक्रिया की आड़ में अवैध गर्भपात करने वाले केंद्रों की भी पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सभी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) और 12 सप्ताह से अधिक के गर्भपात के मामलों में रिवर्स ट्रैकिंग लागू कर रहा है, विशेषकर जहां महिलाओं की पहले से ही एक या अधिक बेटियां हैं। पिछले सप्ताह रिवर्स ट्रैकिंग के संदिग्ध मामलों में 10 और एफआईआर दर्ज की गईं।

बैठक में बताया गया कि 15 जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो छापेमारी और डेकोय ओपरेशन जैसे लगातार क्षेत्रीय अभियानों का परिणाम है। हालांकि, पांच जिलों अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल और सिरसा ने उम्मीद से कम प्रदर्शन किया है और पिछले वर्ष की तुलना में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। सख्त कार्रवाई के आदेश देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पीएनडीटी अधिनियम के तहत इन पांच जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की सभी शक्तियां वापस ले ली जाएं और पड़ोसी जिलों के सीएमओ को दे दी जाएं। उन्होंने कहा कि नए सीएमओ तुरंत इन जिलों का कार्यभार संभालें और लिंगानुपात में सुधार के लिए काम शुरू करें।

उन्होंने यह भी आदेश दिया कि इन जिलों में पीएनडीटी अधिनियम के नोडल अधिकारियों को चार्जशीट किया जाए तथा उनके स्थान पर नए अधिकारी नियुक्त किए जाएं। इन जिलों में अवैध गर्भपात को रोकने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की निगरानी के लिए एचसीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित विशेष राज्य दस्ते (स्कवॉड) गठित किए जाएंगे। जिन जिलों ने लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हासिल किया है, उन जिलों को उनके प्रयासों के लिए प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि लिंग निर्धारण परीक्षण सहित अवैध गर्भपात प्रथाओं में शामिल डॉक्टरों/झोलाछाप डॉक्टरों की प्रामाणिक और सटीक जानकारी संबंधित सीएमओ को प्रदान करने वाले किसी भी व्यक्ति को 1 लाख रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक रिपुदमन सिंह ढिल्लों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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