Monday, August 10, 2026
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मुंहासों को ठीक करने के लिए करें ये उपाय

Health News : किशोरावस्था में कदम रखते ही हार्मोन में आये बदलावों के कारण कई प्रकार की समस्याएं भी आती हैं। इन्हीं में से एक है चेहरे पर होने वाले मुंहासे (एक्ने) । एक्ने को आयुर्वेदिक उपचार से ठीक किया जा सकता है। दरअसल त्वचा के नीचे स्थित सिबेशस ग्लैंड्स से त्वचा को नम रखने के लिए एक तेल निकलता है। ये ग्रंथियां चेहरे, पीठ, छाती और कंधों पर सबसे ज्यादा होते हैं। अगर ये ज्यादा सक्रिय हो जाएं तो रोमछिद्र चिपचिपे होकर बंद हो जाते हैं और उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो आगे चलकर एक्ने का कारण बनते हैं। सिबेशस ग्लैंड्स की अति सक्रियता की प्रमुख वजह एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता होती है। एंड्रोजन पुरुष सेक्स हार्मोन है और यह लड़के और लड़कियों दोनों में ही होता है। किशोरावस्था में इसका प्रभाव ज्यादा होता है। आइए हम आपको एक्नेै के उपचार के लिए आयुर्वेद तरीकों के बारे में बताते हैं।

एक्ने की समस्या कुछ लड़कियों को पीरियड्स से पहले बार-बार मुंहासे निकल आते हैं जो बिगड़कर एक्ने का रूप ले सकते हैं। ऐसा ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन के ज्यादा सिक्रीशन की वजह से भी होता है। इससे त्वचा पर छोटे-छोटे दानों के गुच्छे जैसे बन जाते हैं। इसी तरह सिबेशस ग्रंथियों से उत्पन्न सीबम त्वचा के पिगमेंट मिलकर रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देता है तो ब्लैकहेड्स बनते हैं। अगर त्वचा की अंदरूनी परत में सीबम जमा हो जाता है तो व्हाइटहेड्स बनते हैं। कई बार ब्लैकहैड्स और व्हाइटहेड्स त्वचा के भीतर फैलने के बाद फूट जाते हैं, जिससे बाहरी त्वचा पर एक्ने और ज्यादा फैल सकता है।

दरअसल टीनेज में हार्मोंस में लगातार बदलाव आते रहते हैं, नतीजन चेहरे पर दाग, धब्बे, मुंहासे और एक्ने की समस्या होने लगती हैं। एक्ने ऐसी समस्या है जो आमतौर पर टीनेज और युवावस्था में अधिक होती है। अगर आपके परिवार में पहले भी परिवार वालों को एक्ने रहे हैं यानी आपके मां या पिता को भी यह समस्या रही है तो भी आपको इससे बचाव के लिए तैयार रहना चाहिए। एक्ने त्वचा का एक विकार है। एक प्रकार से यह मुंहासों का ही बिगड़ा हुआ रूप है। गाय के ताजे दूध में चिरौंजी पीसकर इसका लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें। इससे एक्ने की समस्या से निजात मिलेगी।

चमेली के तेल को सुहागा में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाकर मसलें। सुबह बेसन को पानी से गीला कर गाढ़ा-गाढ़ा चेहरे पर लगाकर मसलें और पानी से चेहरा धो डालें। इससे चेहरे पर होने वाली जलन पर बहुत आराम मिलेगा।मसूर की दाल 2 चम्मच लेकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा सा दूध और घी मिलाकर फेंट लें और पतला-पतला लेप बना लें। इस लेप को मुंहासों पर लगाएं।मुंहासों को दूर करने के लिए जायफल भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए साफ पत्थर पर पानी डालकर जायफल घिसकर लेप को कील-मुंहासों पर लगाएं।

अन्य आयुर्वेदिक उपाय – शुद्ध टंकण और शक्ति पिष्टी (आयुर्वेदिक दुकानों में उपलब्ध) 10-10 ग्राम मिलाकर एक शीशी में भर लें। थोड़ा सा यह पावडर और शहद अच्छी तरह मिलाकर कील-मुंहासों पर लगाएं।लोध्र, वचा और धनिया, तीनों 50-50 ग्राम खूब बारीक पीसकर शीशी में भर लें। एक चम्मच चूर्ण थोड़े से दूध में मिलाकर लेप बना लें और कील-मुंहासों पर लगाएं। आधा घंटे बाद पानी से धो डालें।सफेद सरसों, लोध्र, वचा और सेन्धा नमक 25-25 ग्राम बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें। एक चम्मच चूर्ण पानी में मिलाकर लेप बना लें और कील-मुंहासों पर लगाएं।
मसूर, वट वृक्ष की कोंपलें (नरम छोटी पत्तियां), लोध्र, लाल चन्दन, सब 10-10 ग्राम बारीक चूर्ण करके मिला लें। एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसे कील-मुंहासों पर लगाएं। आयुर्वेद उपचार के साथ ही एक्ने की समस्यां से बचने के लिए चेहरे की साफ-सफाई रखना जरूरी हैं, ऐसे में चेहरे को बार-बार पानी से धोएं।

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