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सुप्रीम कोर्ट का रोड सेफ्टी पर सख्त रुख: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किया जवाब तलब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रोड सेफ्टी और मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के नियमों के पालन के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब तलब किया है। यह सुनवाई इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और रोड सेफ्टी उपायों को लागू करने के संबंध में हुई।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस. ओका और उज्जल भुइयां की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि अब तक केवल 5 राज्यों (पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल) के साथ ही एक केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली) ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है। ऐसे में अन्य 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के पास अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द जमा करें।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आवश्यकता – सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों, जंक्शनों और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण लगाए जाने चाहिए। इन उपकरणों के जरिए वाहनों की गति पर नजर रखी जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी किए जाएंगे।

मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 136ए – कोर्ट ने 2 सितंबर 2024 को सभी राज्यों को मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 136ए को लागू करने के निर्देश दिए थे। यह प्रावधान तेज गति वाले वाहनों की निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति देता है। साथ ही, एक्ट के नियम 167ए के तहत, इलेक्ट्रॉनिक फुटेज के आधार पर चालान जारी किए जा सकते हैं।

कोर्ट के केंद्र को निर्देश – सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए आदेश भेजने को कहा कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जल्द से जल्द इस एक्ट के प्रावधानों को लागू करें।

कमेटी करेगी समीक्षा – इन रिपोर्ट्स की 25 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट की कमेटी समीक्षा करेगी। समीक्षा के बाद केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और रोड सेफ्टी के उपायों की संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर विचार करेगी।

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