Tuesday, October 6, 2026
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पंजाब के स्कूलों में साल भर चलने वाले ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के तहत करवाई जाएंगी नशा विरोधी जागरूकता गतिविधियाँ

चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के नशों के खिलाफ अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ के तहत पंजाब भर के स्कूलों में विद्यार्थियों को नशाखोरी के जोखिमों और घातक प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए रचनात्मक गतिविधियों की श्रृंखला शुरू करने के लिए कहा गया है, ताकि उन्हें स्वस्थ, नशा मुक्त जीवन शैली की ओर प्रोत्साहित किया जा सके। स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.) द्वारा जारी की गई गतिविधि कैलेंडर के अनुसार स्कूल द्वारा पूरे शैक्षणिक वर्ष के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और सभी स्थानीय समुदाय की भागीदारी वाली गतिविधियाँ करवाई जाएंगी। अगस्त माह में विद्यार्थियों द्वारा ‘नशा विरोधी’ संदेश वाले पोस्टर बनाए जाएंगे।

इस नशा विरोधी अभियान के तहत सितंबर माह अभिभावकों को शामिल करने के लिए समर्पित होगा। स्कूलों के प्रबंधकों को नशीले पदार्थों के कारण उत्पन्न होने वाले खतरों और नशाखोरी की जल्द पहचान तथा उचित कार्रवाई के महत्व से अवगत करवाने के लिए अभिभावक-शिक्षक बैठकें (पी.टी.एम.) करवाने के लिए कहा गया है। इसी प्रकार अक्टूबर माह में कविता लेखन और क्विज प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। नवंबर से फरवरी माह तक नशा-विरोधी जागरूकता कार्यशालाएं करवाने के अलावा स्थानीय समुदाय को अपने-अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सुबह की सभाओं में नशों से दूर रहने के लिए शपथ ली जाएगी और विद्यार्थियों के साथ इंटरैक्टिव सत्र करवाए जाएंगे, ताकि उन्हें नशों के जोखिम और घातक प्रभावों से अवगत करवाकर स्वस्थ जीवन शैली की ओर प्रेरित किया जा सके।

स्कूलों को नशा-मुक्त क्लब स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिनमें शिक्षक, प्रधानाध्यापक और गैर-शिक्षण स्टाफ को सदस्यों के रूप में नामित किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों को रचनात्मक और इंटरैक्टिव प्रारूपों के माध्यम से जागरूकता गतिविधियाँ करने के लिए भी कहा गया है, ताकि विद्यार्थी पारंपरिक व्याख्यानों से आगे बढ़कर इस गंभीर मुद्दे के महत्व को समझ सकें। स्वस्थ जीवन शैली और निर्णय लेने की क्षमता पर केंद्रित गतिविधियाँ इस नवीन कार्यक्रम का अभिन्न अंग हैं। इस कार्यक्रम के तहत ऐसे शिक्षकों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो यह जानते हों कि नशों के शिकार विद्यार्थियों से कैसे निपटना है। 21,000 से अधिक शिक्षकों को विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य चिंताओं और नशाखोरी के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और समय पर हस्तक्षेप करने के लिए आवश्यक क्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस किया जा रहा है।

इसके अलावा स्कूल के विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के घातक प्रभावों और परिणामों के बारे में जागरूक करने के लिए वीडियो-आधारित नशा विरोधी पाठ्यक्रम का उपयोग किया जाएगा। जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ स्कूलों को टिप-ऑफ बॉक्स लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि विद्यार्थी नशीले पदार्थों के संदिग्ध दुरुपयोग या इससे संबंधित मुद्दों की रिपोर्ट कर सकें।इस संबंध में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, ”नशों के खिलाफ लड़ाई कक्षाओं से शुरू होनी चाहिए। नशों के खिलाफ इस निर्णायक जंग में नशों के प्रभावों के बारे में जागरूकता और रोकथाम हमारे सबसे शक्तिशाली हथियार हैं। जागरूकता, मूल्यों और अनुशासन के माध्यम से युवाओं को दिशा देना ही पंजाब में नशों के खतरे को जड़ से समाप्त करने का एकमात्र जरिया है।”

इसके अलावा स्कूलों के आसपास 500 मीटर का नशा-मुक्त जोन सुनिश्चित करने और समय-समय पर इसके अनुपालन संबंधी रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। गतिविधियों की निगरानी के लिए विधि भी अनिवार्य की गई है, जिसके तहत स्कूल प्रमुख और सलाहकार काम की समीक्षा करेंगे और फोटो सहित रिकॉर्ड रखेंगे। साल भर चलने वाली ये गतिविधियाँ पंजाब के व्यापक ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान का हिस्सा हैं और ये विद्यार्थियों की भागीदारी, शिक्षकों की क्षमता-निर्माण, शैक्षिक सामग्री और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्कूलों में निरंतर रोकथाम वाला माहौल सुनिश्चित करेंगी।

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