Saturday, May 2, 2026
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन की देखभाल हेतु 481 वैटरनरी टीमें तैनात, 22,000 से अधिक पशुओं का इलाज किया

चंडीगढ़ : पंजाब के पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री  गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए पंजाब के पशुपालन विभाग की 481 टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन की देखभाल और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रत्येक टीम में 4 सदस्य होते हैं, जिनमें एक वैटरनरी अधिकारी, वैटरनरी निरीक्षक/फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल है। बाढ़ के गंभीर प्रभावों को उजागर करते हुए खुड्डियां ने बताया कि पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर, फाजिल्का, कपूरथला, बरनाला, बठिंडा, होशियारपुर, तरन तारन, पटियाला, जालंधर, रूपनगर और मोगा सहित 14 जिलों में 504 गायों/भैंसों, 73 भेड़-बकरियां और 160 सूअर मारे गए हैं। इसके अलावा पोल्ट्री शेड ढहने के कारण गुरदासपुर, रूपनगर और फाजिल्का में 18,304 पोल्ट्री पक्षी मरे हैं।

उन्होंने बताया कि बाढ़ से लगभग 2.52 लाख पशुधन और 5,88,685 पोल्ट्री पक्षी प्रभावित हुए हैं। पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों के बारे में जानकारी साझा करते हुए खुड्डियां ने बताया कि प्रदेशभर में प्रभावित पशुओं के इलाज और दवाइयों की व्यवस्था हेतु 481 टीमें तैनात की गई हैं। अब तक 22,534 जानवरों का इलाज किया जा चुका है। इसके साथ ही राहत कार्यों में बेहतर तालमेल और आपात स्थिति से निपटने के लिए मुख्यालय (संपर्क नंबर 0172-5086064) और जिला स्तरीय कार्यालयों में 24झ्7 सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे राहत कार्यों में सहयोग करें और समर्पित कंट्रोल रूम में पशुओं से संबंधित समस्याओं की रिपोर्ट करने की अपील की।

उन्होंने बताया कि विभाग ने जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों के सहयोग से बाढ़ प्रभावित जिलों में पशुओं की सहायता के लिए 12,170 क्विंटल से अधिक फीड और 5090.35 क्विंटल हरा चारा, सूखा चारा और साइलज सहित राहत सामग्री वितरित की है। पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें यूरोमिन लिक्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने बताया कि विभाग ने बाढ़ से प्रभावित जानवरों के इलाज हेतु पहले ही कुल 31.50 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम पर आने वाली कॉलों पर तुरंत कार्रवाई करें, प्रभावित जानवरों को समय पर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराएं और प्रभावी राहत कार्यों के लिए जिला प्रशासन तथा सामाजिक संगठनों से तालमेल बनाए रखें।

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