नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का विषय राज्यसभा में उठाया। सोनिया गांधी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पारित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का आधार है। इस अधिनियम में अनौपचारिक क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रति बच्चा 6,000 रुपये की मातृत्व पात्रता शामिल है। हालांकि, 2017 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) का उद्देश्य पात्रता को पूरा करना है, लेकिन यह पहले बच्चे के लिए केवल 5,000 रुपये देती है। उन्होंने कहा कि अगर नवजात लड़की है, तब दूसरे बच्चे के लिए भी इस बढ़ाया जाता है।
सोनिया गांधी ने सदन में कहा कि वर्ष 2022-23 के लिए एक सूचित विश्लेषण के अनुसार, करीब 68 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को अपने पहले जन्मे बच्चे के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की एक किस्त मिली। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष यह संख्या नाटकीय रूप से घटकर केवल 12 प्रतिशत रही। सोनिया गांधी ने इस पर अपनी चिंता जाहिर की।
सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र बताएं कि ऐसा क्यों होने दिया गया। इसके साथ ही कहा कि मातृत्व लाभ प्रावधान के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए करीब 12,000 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट की आवश्यकता है। उन्होंने सदन को बताया कि आश्चर्यजनक रूप से, बजट दस्तावेजों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए आवंटन के बारे में अलग से जानकारी नहीं है। 2025-26 में सामर्थ्य के लिए आवंटन केवल 2,521 करोड़ रुपये है।